तेजस्वी यादव का नाम वोटर लिस्ट से हटाने का दावा: भाजपा का पलटवार, चुनाव आयोग ने भी किया खंडन new

August 2, 2025 • vikalpthakur2426@gmail.com

तेजस्वी यादव का नाम वोटर लिस्ट से हटाने का दावा: भाजपा का पलटवार, चुनाव आयोग ने भी किया खंडन

तेजस्वी यादव का नाम वोटर लिस्ट से हटाने का दावा: भाजपा का पलटवार, चुनाव आयोग ने भी किया खंडन new

 

लेखक: एबीपी लाइव
संस्करण: विजय कुमार बिट्ठल | प्रकाशन तिथि: 02 अगस्त 2025, 09:57 PM (IST)
स्रोत: PTI

🔸 विवाद की शुरुआत: तेजस्वी यादव का आरोप

बिहार की राजनीति में उस समय एक नया मोड़ आ गया जब राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव ने एक सनसनीखेज दावा किया कि उनका नाम बिहार की मतदाता सूची से हटा दिया गया है। उन्होंने यह आरोप चुनाव आयोग पर लगाते हुए कहा कि बिहार में चल रही Special Intensive Revision (SIR) 2025 प्रक्रिया के तहत यह “साजिशन” किया गया है। new

तेजस्वी यादव ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर एक पोस्ट कर इस मामले को सार्वजनिक किया और कहा कि यह सिर्फ उनके साथ नहीं, बल्कि लाखों लोगों के साथ हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि 65 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम बिना पर्याप्त जांच या स्पष्टता के हटा दिए गए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग ने जानबूझकर नियमों की अनदेखी कर इस सूची को जारी किया है, जो पूरी तरह से पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया के विरुद्ध है। new

🔸 भाजपा का तीखा जवाब: ‘फर्जी मकसद से किया जा रहा नाटक’

तेजस्वी यादव के इस आरोप पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने तेजस्वी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि उनके पास दो अलग-अलग EPIC नंबर (मतदाता पहचान संख्या) हैं और इनमें से कोई चुनाव आयोग के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता, तो यह आपराधिक कदाचार की श्रेणी में आएगा। new

मालवीय ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “अगर तेजस्वी यादव वह EPIC नंबर दिखा रहे हैं  जो आयोग के रिकॉर्ड या उनके खुद के नामांकन शपथपत्र से मेल नहीं खाता, तो यह बहुत ही गंभीर मामला है। यह सिर्फ एक व्यक्तिगत विसंगति नहीं है, बल्कि फर्जी पहचान और मतदाता सूची में गड़बड़ी को छिपाने का प्रयास है।” new

उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में जो SIR प्रक्रिया चल रही है, उसका उद्देश्य ही यही है— डुप्लीकेट, फर्जी नामों और अन्य अनियमितताओं को पहचानकर उन्हें सूची से हटाना। “किसी भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी हाई-प्रोफाइल क्यों न हो, को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता,” उन्होंने जोड़ा।

🔸 चुनाव आयोग की सफाई: नाम सूची में है

तेजस्वी यादव के आरोपों को चुनाव आयोग ने सिरे से खारिज कर दिया। पटना के जिलाधिकारी और मुख्य चुनाव पदाधिकारी (CEO) डॉ. त्यागराजन एसएम ने ANI को दिए गए बयान में साफ कहा कि तेजस्वी यादव का नाम मतदाता सूची में मौजूद है।

उन्होंने कहा, “विपक्ष के नेता का नाम उसी मतदान केंद्र पर दर्ज है जहां से वह पहले वोट डालते रहे हैं। उनके द्वारा लगाए गए आरोप झूठे और भ्रामक हैं। यह जानकारी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है, और कोई भी व्यक्ति इसे देख सकता है।” new

डॉ. त्यागराजन ने यह भी स्पष्ट किया कि 2020 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने जिस EPIC नंबर का उल्लेख अपने नामांकन में किया था, वही नंबर अब भी वैध और उपयोग में है। अगर वह अब किसी दूसरे EPIC नंबर का जिक्र कर रहे हैं, तो उन्हें उस दस्तावेज को प्रस्तुत करना होगा, जिससे पता चल सके कि वास्तव में किस नंबर की बात हो रही है। new

🔸 क्या है SIR प्रक्रिया और क्यों मचा है बवाल?

SIR (Special Intensive Revision) एक विशेष प्रक्रिया है, जिसे चुनाव आयोग समय-समय पर आयोजित करता है ताकि मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिहीन बनाया जा सके। इसके अंतर्गत फर्जी, डुप्लीकेट और निष्क्रिय मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाते हैं।

इस बार की SIR प्रक्रिया में आयोग ने लगभग 65 लाख नाम हटाने की बात कही है। इसने विपक्षी दलों के बीच शंका और असंतोष पैदा कर दिया है। खासकर तेजस्वी यादव जैसे बड़े नेताओं का नाम अगर सूची से हट जाए, तो इससे चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो सकते हैं। new

हालांकि, आयोग का कहना है कि यह हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी, डेटा-संचालित और कानूनसम्मत है। हर एक वोटर को सत्यापन का मौका दिया गया है, और सभी शिकायतों के लिए निर्धारित मंच भी उपलब्ध हैं। new

🔸 राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर

इस पूरे मामले ने बिहार की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। तेजस्वी यादव जहां इसे विपक्ष के खिलाफ एक राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, वहीं भाजपा इसे एक राजनीतिक नाटक कह रही है। new

तेजस्वी का कहना है कि यह सिर्फ उनके खिलाफ नहीं, बल्कि आम लोगों के अधिकारों पर हमला है। वहीं भाजपा का तर्क है कि यह सिर्फ तेजस्वी की छवि निर्माण की एक रणनीति है ताकि मतदाताओं की सहानुभूति अर्जित की जा सके। new

🔸 आगे क्या?

इस विवाद के बीच अब निगाहें इस पर टिक गई हैं कि क्या तेजस्वी यादव आयोग को कोई वैकल्पिक EPIC नंबर या दस्तावेज सौंपते हैं, या फिर यह मामला सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहेगा। चुनाव आयोग ने अभी तक किसी जांच की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन अगर इस विवाद को लेकर शिकायत दर्ज होती है, तो विस्तृत जांच संभव है। new


✍️ निष्कर्ष

तेजस्वी यादव के मतदाता सूची से नाम हटाने के दावे ने बिहार की राजनीति में गर्मी ला दी है। जहां एक तरफ तेजस्वी इस मसले को लोकतंत्र और पारदर्शिता का मुद्दा बना रहे हैं, वहीं भाजपा इसे गंभीर अनियमितता और फर्जीवाड़े की आशंका बता रही है। चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर स्थिति स्पष्ट कर दी है, लेकिन यह विवाद अभी थमता नहीं दिख रहा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर अगर तेजस्वी कोई नया दस्तावेज या तथ्य सामने लाते हैं। new

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